Friday, April 10, 2026

हिरोशिमा से लौटकर

तीसरे विश्वयुद्ध की छाया में हिरोशिमा से लौटकर 

# मूलचन्द्र गौतम 


युद्ध 
मनुष्य के इतिहास -भूगोल का 
अनिवार्य सत्य है 
जो चाहे जर, जोरू,जमीन के नाम पर लडा गया हो 
या 
नाक के सवाल पर 
एकमेव अद्वितीय, सर्वोच्च, चक्रवर्ती मनवाने की जिद 

सुर -असुर  ,नाग, आर्य-द्रविड, काले-सफेद 
सबके बीच जारी रहा है युद्ध 
हर देश,  जाति,सभ्यता का इतिहास 
तारीखों में दर्ज युद्धों का इतिहास है 
जिससे कोई सबक सीखने को तैयार नहीं है
युद्ध रुकवाने का श्रेय लेकर 
नोबेल के आकांक्षी भी नहीं 

लोकतंत्र और परमाणु शक्ति की आड में 
प्राकृतिक संसाधनों का अकूत दोहन 
इशारों पर नाचने वाले सत्ता के मोहरों की चाह 
किसी अमूर्त परमात्मा की लीला और माया नहीं 
महाशक्तियों का खुला खेल-खिलवाड है 


अकूत वर्चस्व की चाह 
झोंक देती है युद्ध में 
नष्ट हो जाता सारा विवेक 
पर्ल हार्बर के बदले हिरोशिमा 
बर्बर हिंसा प्रतिहिंसा 
अरे इन दोउन राह न पाई
यूक्रेन, ईरान...
 आबादी की बर्बादी 
 मासूम निर्दोषों की बलि 
अहंकार के रावण की मनमानी 

व्यर्थ हैं इसके आगे 
सारे सद्भाव, मानवता के नारे 
बुद्ध, गांधी, लूथर किंग...
 प्रार्थनाएं ,किताबें, प्रवचन...