Tuesday, April 21, 2026

आलपिन पर टँगा हुआ कंबल

आलपिन पर टँगा हुआ कंबल 

# मूलचंद्र गौतम 

दुनियाभर में सात आश्चर्य तो तय हैं आठवें की तलाश जारी है. इस तलाश में विश्व की तमाम ताकतें जी जान से लगी हुई हैं. अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी मैदान में कूद पडी है लेकिन यह तलाश ब्रह्म की तरह अनंत होती जा रही है जिसका न कोई ओर मिल रहा है न छोर. 

बैठे ठाले सुडोकू की पहेलियाँ हल करते करते अचानक अनहद की धुन में आकाश में आठवें आश्चर्य की तरह एक बिम्ब झिलमिलाता है आलपिन पर टँगा हुआ कंबल. यह भीगा हुआ हो तो और ज्यादा चमत्कार  . विस्तृत होते इस बिम्ब में अनेक आकृतियाँ गड्डमड्ड होने लगती हैं.रामायण पढ लेने और चिट्ठी पत्री बांच लेने लायक  कालिदास की तन्वी 
श्यामा शिखरि दशना पक्व बिम्बाधरोष्ठी आलपिन में परिवर्तित होने लगती है. शर्मीली सकुचाई दुबली पतली नववधू.जिसका विवाह एक पति नामक निरीह प्राणी से हुआ है लेकिन उसके मासूम कंधों पर पूरे कुल खानदान का भार है. दोनों कुल की लाज उसे मरते दम तक निभानी है. कुलदेवी तभी उसे कुलवधू का कीमती खिताब बख्शेंगी. गृहप्रवेश करते ही उसे घर की एक कमजोर दीवार पर खोंस दिया गया है ताकि वह पूरी ताकत से भीगे हुए कुल कंबल का बोझ उठाकर चल सके. भले इस बोझ से उसकी कमर कमान हो जाए. वह कंबल को छोड़ना भी चाहे तो कंबल उसे सात जन्मों तक नहीं छोड़ेगा. इन्हीं गुणों के बल पर वह महादेवी, महीयसी, महाशक्ति ....जैसे महान विशेषणों से सुसज्जित कर दी जाती है. आठों याम आरती की तरह उसका गुणगान होता है. 

अचानक दृश्य बदलता है.पढी लिखी रोजगारशुदा आलपिन तनकर खडी हो जाती है.गृहप्रवेश करते ही सदियों से परंपरानुसार जबरन लादे गये भीगे हुए कुल कंबल को झटक कर फेंक देती है.अब वह केवल बच्चे पैदा करने वाली मशीन नहीं. उसे नहीं ढोनी दोनों कुल की लाज. नहीं बनना उसे अन्नपूर्णा. उसके मारक टोटके से दिन में भी बात तक न करने वाला निरीह पति कुटुंब के लिए रिपुरूप और ससुराल प्रेमी हो गया है. चौके चूल्हे और बच्चों के पालन-पोषण में भी मददगार है  .यह सब देखकर पूरा कुल सन्न है. दहेज विरोधी कानून का आलपिन हाथ में आ जाने से वह पूरे कुनबे को जेल में चक्की पिसवा सकती है.पति से तलाक लेने में उसे अब कोई हिचक नहीं.

 कलिकाल के प्रभाव से आधुनिक कुलवधू हो गयी है कुलटा, कुल कलंकिनी ,कुलबोरन....संत समाज उसकी सामूहिक सामाजिक भर्त्सना, निंदा में लग गया है. आठ अवगुनों की खान ,माया महाठगिनी, नरक का द्वार...वगैरह वगैरह. आगे आगे देखिए होता है क्या?जब यह आलपिन भाले का रूप ले लेगी. 


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