व्यंग्य
तबाही का दूसरा नाम
शेरसिंह है और पहला .....
# मूलचन्द्र गौतम
पुराने जमाने के चाचा चौधरीनुमा कामिक्स और वीडियो गेम की तर्ज पर चार साल का पोता नियंत
चौबीस घंटे मोटू -पतलू और गट्टू -बट्टू और इसी तरह के कामिक्स और कहानियों के
चक्कर में रहता है .उसे तमाम डायलाग रटे हुए हैं .कहीं से भी किसी से भी चालू हो
जाता है और लोग हंस हंसकर लोट पोट हो जाते हैं .सारे बाबा ढोंगी हैं यानी सब धान
बाईस पसेरी . सबको एक ही डंडे से हांकने की उसकी जिद के आगे सारे तर्क फेल .सत असत
का विवेक गायब . उसके लिए हर आदमी बैंक लुटेरा है और वह पुलिस बनकर उसके पीछे दौड़
रहा है . हर वक्त ढिशुम ढिशुम ,हिंसा मारामारी .मनमानी सर ,चम्मच सिंह ,दांयाँ –बाँयां
,कीमा ....उसके संगी साथी .अब उसे कौन समझाये कि कुछ बाबा असली हैं और हर आदमी चोर उचक्का ,गिरहकट नहीं है लेकिन समाज
का जो माहौल बन रहा है उसमें विकल्प भी क्या है ? उसके पास तमाम तरह की कारों का
पूरा फ्लीट है .रास्ते में चलते हुए वह हर कार को पहचानता है कुछ नई विदेशी कारों
को छोडकर .हर मामले में वह हमसे अधिक उत्तराधुनिक है . नाना और मामा ने उसके सामने
कारों और खिलौनों ढेर लगा दिए हैं . अपनी
पसंद के कपड़े और खाना उसकी प्राथमिकताएँ हैं .माल में घूमना उसका प्रिय शगल है. .
वह नया जिद्दी उपभोक्ता है कैच देम यंग की रणनीति के तहत .करोड़ों ,अरबों की पूँजी
उसका खेल है . क्या यह भावी पीढ़ियों के विरुद्ध कोई अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र है ?आपको
भी बच्चों से पीछा छुड़ाने का यही आसान रास्ता नजर आता है कि उसे इस नकली आभासी दुनिया में या डे
केयर में धकेलकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएँ .पैसे कमाने की धुन में
बच्चे बरबाद हों तो हों अपनी बला से .तबाही का दूसरा नाम शेर सिंह है और पहला आप
और आपकी संस्कृतिहीन सरकार जो देश के भावी नागरिकों को इस नीले पीले नशे का आदी
बना रही है .हर आदमी हर वक्त मोबाइल से चिपका है .व्हाट्स एप के चुटकुलों की चर्चा
समय बिताने का अचूक माध्यम है .
चाल ,चरित्र और चेहरे बदलने की उम्मीद में आई सरकार के पास उछालने के
लिए जुमलों की कमी नहीं है . मन्दिर मस्जिद से आगे उन्हें कुछ नहीं दीखता .शिक्षा
,संस्कृति ,भाषा ,स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में वे कुछ नहीं करना चाहते
.यथास्थिति के बीच जेनयू ,एएमयू और बीएचयू ही उनका मुख्य एजेंडा है जिसके बल पर वे
चक्रवर्ती हो जाना चाहते हैं .इस्लाम ,ईसाईयत ,गरीब विरोधी नकली हिंसक हिंदुत्व के
बल पर सत्ता में आई सत्ताधारियों की फ़ौज जैसे मोटू पतलू टाइप कामिक्स की दुनिया से
ही निकल कर आई है .सास भी कभी बहू थी मार्का सीरियलों की उपज इसके मंतरी और
संतरी खलनायकों के इतिहास और घोटालों की
आड़ में खुद के कुकर्मों को ढंकने की नैतिकता और बहस से लैस हैं .कुतर्कों में खुदा
भी उन्हें हरा नहीं सकता .पंचतन्त्र के तमाम चरित्र और पात्र खुलकर सामने आ गये
हैं .सांप ,बिच्छु ,केकड़ों की मौज है क्योंकि उनका कोई नामलेवा भी नहीं था और अब
नामजप चल रहा है .
चुनाव जीतना ही जैसे कलिकाल का परम पुरुषार्थ है .मूरख थे पुराने
पुरखे जिन्हें चुनाव नाम की चिड़िया का अता पता ही नहीं था .उनके प्रथम पुरुषार्थ
धर्म की इन दिनों जो ऐसी तैसी हो रही है उसने नास्तिकों को भी धार्मिक बनने पर
मजबूर कर दिया है .वे भी मोक्ष के अनुयायी हो गये हैं .संसद से बड़ी हो गयी हैं
धर्म संसदें .सुप्रीमकोर्ट को निर्देश देने लगे हैं साधु संत ,महामंडलेश्वर
,शुकाचार्य .कठमुल्ले .राजनीति में योगी भोगी रोगी और व्यापारी का फर्क खत्म कर दिया है . हाथ में
मोटा कलावा और भगवा कुरता और अंगोछा धार्मिक होने का लाइसेंस है .मन न रंगाये
रंगाये जोगी कपड़ा .लगता है कल्कि अवतार जल्दी होगा ?
गड़े मुर्दों की बहार है .जाति,गोत्र ढूंढे जा रहे
हैं .नेताओं की ननिहाल ददिहाल और रिश्तेदारों की कुंडलियाँ खंगाली जा रही हैं
,जैसे यही सबसे बड़ा विकास है .हथियारों की अंतरराष्ट्रीय दलाली ने भ्रष्टाचार के
तमाम पुराने रिकार्ड तोड़ दिये हैं .चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने मार्क्स की तर्ज पर धर्म को अफीम मानना बंद कर
दिया है .उसे रूस की तरह देश के खंड खंड पाखण्ड होने का भय सताने लगा है .दलाई
लामा से उसे आज भी डर है कि कहीं ये प्रेत
फिर ताकतवर न हो जाय और अमेरिका उसकी आड़ में बाँहें न मरोड़ने लगे .ट्रम्प के मुंह
का जायका हर समय वैसे ही बिगड़ा रहता है .पूरा विश्व उसकी टेढ़ी भ्रकुटि से घबराता
है .उसकी मुट्ठी में कैद हैं जग की सांसें . बस एक बटन दबाने भर की देर है .
# शक्तिनगर,चन्दौसी ,संभल 244412
मोबाइल 9412322067
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