भई गति साँप छछूंदर केरी
# मूलचन्द्र गौतम
जन्मजात वैरी साँप और नेवले की लड़ाई तो जनता मदारी के खेल में और जंगल में अक्सर देख लेती है लेकिन साँप छछूंदर के ओलम्पिक में जो मजा आता है वह और कहाँ?
होने को तो मुर्गों की खूनी जंग भी कम मजेदार नहीं होती लेकिन वो गुजरे जमाने के नबाबों के साथ स्वर्ग सिधार गयी ।कबूतरबाजी का शौक भी अब डिजिटल दुनिया में कितनों को नसीब हो पा रहा है।पतंगबाजी भी केवल मकरसंक्रांति और वसंतपंचमी तक सीमित रह गयी है।राजनीति के बारीक दांवपेचों ने ताश के बावन पत्ते और शतरंज की चालों को पीछे छोड़ दिया है।चार सौ बीसी अब सिर्फ एक सम्मानजनक धारा है ,अपराध नहीं।
बच्चों को अब कार्टूनों के आगे कुछ अच्छा नहीं लगता।कारों की रेस के दीवानों को हिंसा से कम मजा नहीं आता ।अपराध के नये नये तरीके यहीं सावधान इंडिया पर मौजूद हैं।साइबर क्राइम ने जो अपार संसार हमारे सामने खोल दिया है उसमें रोजगार की अनंत सम्भावनाएं हैं।नशे और हथियारों की तस्करी तो रातोंरात अरबपति बनाने के रास्ते हैं ।पहले लोग कमाई के सौ रास्ते वाली किताबें बड़े शौक से पढ़ते थे लेकिन अब गूगल और इंटरनेट की दुनिया ने अरबों खरबों रास्ते फ्री खोल दिये हैं ।अब नटवरलाल एक्सपायर उर्फ ऑउट ऑफ डेट हो चुका है।दुनिया के सारे मजे ऑन लाइन उपलब्ध हैं जो माँगोगे वही मिलेगा की तरह।यही कलिकाल के कामधेनु और कल्पवृक्ष हैं।हिम्मत चाहिए हासिल करने की बस ।मातृवत परदारेषु परधनेषु लोष्ठवत का दौर कब का गुजर गया ।अब तो सोइ सयान जो परधन हारी ।
बाबा भी अपने दौर के बड़े जादूगर थे ।उन्होंने एक से एक जटिल जीवन प्रसंगों को बड़ी कुशलता से रामकथा में गूंथ दिया।धरम सनेह उभय मति घेरी ,भई गति साँप छछूंदर केरी ।त्रेता में राम वनगमन के समय कौशल्या के धर्मसंकट और मानसिक स्थिति को जिस तरह उन्होंने लोकोक्ति के गहन जीवनानुभव में कलिकाल की जनता और नेताओं से जोड़ दिया वह अद्भुत कारीगरी का कमाल है।जीव वैज्ञानिकों की दृष्टि से छछूंदर एक घृणा पैदा करने वाला प्राणी है जो एक विशेष प्रकार की दुर्गंध छोड़ता है। छछूंदर की यह विशेषता है कि यदि सांप उसे निगल ले तो या तो वह अन्धा हो जाता है अथवा मर जाता है ।दांतों की विशेष बनावट के कारण छछूंदर को बाहर उगल नहीं सकता एवं प्राण हानि के भय से वह उसे निगलना भी नहीं चाहता ऐसी परिस्थिति में फंसे साँप की गति को समान परिस्थितियों में फंसे व्यक्ति की तुलना में प्रतीक माना जाता है। अब नेता चाहे नागनाथ हों या साँपनाथ अपने प्रिय खाद्य ईमानदार चूहों को तो मजे से निगल जाते हैं लेकिन घपले ,घोटाले और गलत निर्णयों के छछूंदर से बचना मुश्किल है।हमें तरस आता है उन लोगों की बुद्धि पर जिन्होंने सीबीआई को सरकारी तोता कहा ।पता नहीं क्यों उन्हें इस सिलसिले में छछूंदर जैसे महान जीव का ध्यान नहीं आया जबकि पीछे छछूंदर छोड़ देना प्रचलित मुहावरा है ।खैर ,यह छछूंदर चाहे कोई भी हो और इसका कोई भी नाम हो क्या फर्क पड़ता है?पूरी दुनिया इससे ग्रस्त है तो भारत ही अपवाद क्यों हो ?
इसलिए साँप छछूंदर की दुर्गति में धर्मसंकट के बजाय धर्म तलाशने वालों को बौध्दिक रूप से दरिद्र सिद्ध किया जाना चाहिए।अपनी नालायक संतानों की सात पीढ़ियों की आर्थिक सुरक्षा की गारंटी करने वाले भृष्ट नेताओं अफसरों की दुर्दशा किससे छिपी है ।आखिर जनता जनार्दन सब जानती ,देखती है।वही तय करे कि इतिहास और वर्तमान में कब और कहाँ नायकों और खलनायकों की ऐसी सद्गति हुई ।
# शक्तिनगर, चंदौसी ,संभल 244412
मोबाइल 8218636741
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