Saturday, June 22, 2024

धर्मयुद्ध चालू आहे

धर्मयुद्ध चालू  आहे 



# मूलचन्द्र गौतम 

महलों का राजा मिला रानी बेटी राज करेगी।हर पिता की आदर्श तमन्ना यही होती है क्योंकि बाबुल यही दुआएं दे सकता है।आगे उसका भाग्य रहा।इसीलिए पुराने दौर के माता पिता अपनी बेटी के नाम के आगे रानी या देवी जरूर लगाते थे।कुछ के आगे समाज चस्पा कर देता था नौकरानी से मेहतरानी तक।उसे देवदासी से यौनदासी तक बना देता था।

 सनातन गरीब लडकी वाले विवाह वास्ते  जिस घर वर को देखने जाते थे वहाँ कहते थे कि सब लोग एक एक टुकडा जूठन का छोडेंगे तो उनकी बेटी का पेट भर जायेगा।यानी कहने को रानी हकीकत में नौकरानी।कन्या दान के एवज में सिर्फ रोटी कपडे पर सात जन्मों तक पति परमेश्वर उर्फ राजा के पूरे घर की बेगार और जिन्दगी भर गृहस्थी के कोल्हू में खटना ।धीरे धीरे यही उनकी दिमागी कंडीशनिंग बनकर व्रत पूजा के भाग्य और भगवान की सेवा में लग जाती है और साक्षात शृद्धा बन जाती है।

रानी की बात ही कुछ अलग होती है।उससे भी ज्यादा शान महारानी की होती है,एक राजा की अनेक रानियां हों तो पटरानी की बेटर हाफ होने की खुशी उसी को हासिल होती है ।उनमें भी अलग तरह की प्रतिस्पर्धा चलती है ।हिंदुस्तान जब ईस्ट इंडिया कंपनी के क्रूर शासन से निकल कर इंग्लैंड की क्वीन विक्टोरिया के शासन में आया तो उनकी शान में बडे बडे कसीदे गढे गये।सिक्के भी चले।भारतेंदु जी भी पीछे नहीं रहे हालांकि बाद में उनका मोहभंग हो गया।कॉमनवेल्थ के नाम पर वे आज भी भारतीय उपनिवेश की महारानी हैं ।आजादी के आन्दोलन,असंख्य क्रांतिकारियों के बलिदान के बाद भी जो विभाजित आजादी देश को मिली उसके बाद भी आओ रानी हम ढोएंगे पालकी,यही हुई है राय जवाहरलाल की।अब कट्टर राष्ट्रवादी भी जवाहरलाल को कोसने के बावजूद रानी से पीछा नहीं छुड़ा सकते।

ठीक यही हाल आजादी के बाद हिंदी समेत समस्त भारतीय भाषाओं और संस्कृति का है।आज भी अंग्रेजी देश की महारानी है बाकी भाषाएं नौकरानी।अंग्रेज़ी बोलनेवाले मालिक हैं बाकी गुलाम।हिन्दू हृदय सम्राट भी विश्वविजयी और चक्रवर्ती बनने के चक्कर में हिंदी हृदय को तवज्जो देना नहीं चाहते।गोबर पट्टी की हिंदी जनता भी लोकल हिंदी  दिवस और ग्लोबल  दिवस के झुनझुने बजाकर ही परम प्रसन्न है।उसे हिंदी चुनाव का मुद्दा ही नहीं लगती।

 

अब जमाना बदल गया है।लडकियों के नाम के आगे रानी और देवी जुड़ना बन्द हो गया है।पढी लिखी लडकियों ने अपने अस्तित्व को पहचानना शुरु कर दिया है।इसलिये अब वे परम्परा की चक्की और कोल्हू में जुतने को तैयार नहीं हैं।इसलिये बहूरानी को मुफ्त की नौकरानी समझने वाले सतर्क हो गये हैं।जो नहीं बदले वे जेल की हवा खा रहे हैं।समाज में प्रेम विवाहों के साथ तलाक के मामले भी बढ रहे हैं।इससे मायके में माता पिता द्वारा शान में बट्टे के नाते और ससुरालों में दहेज हत्या जुड गयी हैं ।गैंगरेप तो फैशन बन चुका है।इन कुप्रवृत्तियों के विरुद्ध मिशन शक्ति का धर्मयुद्घ चालू आहे।

# शक्ति नगर,चन्दौसी,संभल 244412

मोबाइल  8218636741

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