Saturday, June 22, 2024

डंकल की छाया में अंकल

 डंकल की छाया में कालनेमि अंकल 

# मूलचन्द्र गौतम

गैट के महानिदेशक आर्थर डंकल ने विश्व व्यापार संगठन की सुविधा और वर्चस्व के लिये आर्थिक सुधारों के नाम पर 1991 में जो ड्राफ्ट दुनिया के सामने पेश किया था अब उसके भयंकर दुष्परिणाम खुलकर सामने आ चुके हैं।वर्तमान में कृषि और श्रम सुधारों के बिल उसी चरणबद्ध  प्रक्रिया के हिस्से हैं।अर्थव्यवस्था के बदलाव के साथ सब कुछ बदलना पड़ेगा।सरकारी नौकरी में घिसटते हुए रूटीन जिन्दगी काटना फिर पेंशन खाते हुए मौत का इन्तज़ार अब बेकार  है।कारपोरेट की  मालदार अनिश्चित नौकरी की तरह खेती और मजदूरी भी कांट्रेक्ट पर आधारित होगी।परिणाम आधारित इस व्यवस्था के लाभ की कल्पना भी मुश्किल है।यों भी व्यापारी का एकमात्र धर्म शुभ लाभ होता है जो चाहे जैसे हासिल हो।

राम राज्य के शौकीनों को इससे बेहद निराशा होगी।

इन सुधारों को सम्पूर्ण रूप से लागू  करने के लिये एक दृढ इच्छा-शक्ति वाले बहुमत की जरूरत  है जो जन भावनाओं की उपेक्षा करने का साहस कर सकता हो इसके लिये चाहे उन्हें कोई भी जोखिम उठाना पड़े ।वैसे भी कहावत है कि जहां अक्लमंद पैर रखते हुए घबराते हैं वहाँ मूर्ख फर्राटा भरते हैं।ऐसे में इन बिलों के खिलाफ आंदोलनरत  यथास्थितिवादी समूह कुछ नहीं  कर सकते।परिवर्तन का रथ उन्हें कुचलता हुआ निकल जायेगा क्योंकि फिलहाल उसका कोई विकल्प नहीं।यों भी बढे हुए कदम वापस लेना मालिक की तौहीन होगी जो उसे कतई बर्दाश्त नहीं।

भारत  में नरसिम्हाराव भूमंडलीकरण की इस गंगा के भगीरथ थे जिनका रथ मनमोहन सिंह हाँक रहे थे फिर आगे चलकर वही रथी हो गये ।रावण रथी विरथ रघुवीरा।भृष्टाचार की सुरसा उनके ढुलमुल मोर्चे की सरकार को निगल गयी जो कोई निर्णय सख्ती से लागू नहीं कर पाई अन्यथा ....प्रणव दा ने भी अपनी किताब में इसका जिक्र किया है।

सोने की लंका का अधिपति मायावी रावण एक महान रणनीतिकार विद्वान था जिसके रथ के पहियों के नीचे  धरती कांपती थी।उसे मालूम था कि कहाँ किस हथियार से काम लेना है ।बाबा ने लंका काण्ड में उसके  युद्ध कौशल का अद्भुत वर्णन किया है।फिर भी उसके तमाम सिपहसालार अनेक रूपों में राम से युद्ध करते हैं और परास्त होते हैं।यह कोरा  काव्य सत्य नहीं।गहरा जन विश्वास है।अनीति और अहंकार  रावण की पहचान है जबकि राम ने कभी नीति और मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया लेकिन अगर रावण ही राम के वेश में आ जाय तब?

लक्ष्मण पर शक्ति प्रहार के बाद संजीवनी लाने के रामकाज में लगे बजरंगबली को रोकने हेतु जिस पाखण्डी कालनेमि का सदुपयोग रावण ने किया वह अद्भुत अचूक प्रयोग था ।उसी महान आत्मा ने कलिकाल में सैमुअल हटिंगटन के रूप में पुनर्जन्म लिया है ।सभ्यता संघर्ष की चिकनी चुपड़ी शब्दावली में इस थिंक टैंक ने पुराने धर्मयुद्ध को पुन: पेश किया है।फर्क इतना भर है कि वहाँ युद्घ सत्य की मर्यादा और असत्य के बीच था तो यहाँ दो सम्प्रदायों के। चूंकि हटिंगटन एक जटिल दिमागी बीमारी  का नाम भी है तो यह सिद्धांत उसी रोग से ग्रस्त लोगों को बहुत पसंद आता है।साम्प्रदायिक घृणा का कालनेमि अमर है कोई कबीर और नानक उसे खत्म नहीं कर सकते । 

राजनारायण बाबा की चौपाइयों से उधार लेकर भारत को नेहरुआ रोग से ग्रस्त बताते थे जिसकी पुनरावृत्ति फिर जोर शोर से हो रही है।उन्हें क्या पता था कि दुनिया में  कोरोना का डमरूआ उससे भी बड़ा खतरा साबित होगा।छद्म धर्मनिरपेक्षता की खुली टक्कर छद्म राष्ट्रवाद और नस्लवाद से होगी।इस खेल में लोकल से लेकर ग्लोबल तक जनता दोनों पाटों के बीच  पिसेगी।

# शक्ति नगर,चन्दौसी,संभल 244412

मोबाइल 8218636741

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