Friday, June 21, 2024

बर्लिन से-दो

बर्लिन से-दो 

 पैदल यात्री, साइकिल और बच्चे 

 पहिया दुनिया का आदिम आविष्कार था 
भारत में जब साइकिल गरीबी का प्रतीक हो चुकी है 
तब कारों के लिए मशहूर जर्मनी में उसे इज़्ज़त मिली है 
लाइफ लाइन 
उसका अलग मार्ग है 
जहाँ से वह निर्विघ्न गुजर सकती है 
शान से 
क्योंकि उसके आगे पीछे बैठे लेटे हुए हैं बच्चे 
अपने प्यारे 
टेड़ी बियर को लेकर 
कभी माँ के साथ 
कभी पिता के 

 
साइकिल यहाँ आम आदमी की सवारी है 
जगह जगह असंख्य साइकिलें तालों में जकडी खड़ी हैं 
आने जाने वालों की प्रतीक्षा में 
चोरों की भी 
जो ले जाते हैं उन्हें अपनी समझकर 
 अब स्कूटरों ने पीछे छोड़ दिया है साइकिल को 
बच्चे भी लेते हैं रफ्तार के मजे 

  भारत में  दुर्घटना में सड़क पर मरते हैं 
ज्यादातर पैदल यात्री 
क्योंकि उनकी जान सबसे सस्ती है 
उन्हें सड़क पार करने के लिये 
नहीं मिलता रास्ता 
इंतजार करते हैं वे घण्टों 
यूरोप में मिलती है उन्हें  बाकायदा इज़्ज़त 
सिग्नल पर उनकी है खास पहचान 
रुकी रहती हैं 
उनके वास्ते कीमती कारें

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